Mayur Sir

Class 9 English Kaveri Poem 4
I Cannot Remember My Mother
Summary and Explain in Hindi

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                                                                                Poem 4

                                                             I Cannot Remember My Mother

                                                                                                                                        Rabindranath Tagore


I cannot remember my mother 

only sometimes in the midst of my play

a tune seems to hover over my playthings,

the tune of some song that she used to 

hum while rocking my cradle.


मुझे अपनी माँ की याद नहीं आती, 

बस कभी-कभी खेलते-खेलते मेरे खिलौनों के ऊपर 

एक धुन मंडराती हुई सी लगती है, 

किसी ऐसे गीत की धुन जो वह मेरा पालना झुलाते हुए गुनगुनाती थी।


I cannot remember my mother

but when in the early autumn morning 

the smell of the shiuli flowers floats in the air

the scent of the morning service in the temple

comes to me as the scent of my mother.


मुझे अपनी मां की याद नहीं आती, 

लेकिन शरद ऋतु की शुरुआत में 

जब शिउली के फूलों की खुशबू हवा में तैरती है, 

तो मंदिर में सुबह की पूजा की खुशबू 

मुझे मेरी मां की खुशबू के रूप में याद आती है।


I cannot remember my mother

only when from my bedroom window I send

my eyes into the blue of the distant sky,

I feel that the stillness of

my mother’s gaze on my face

has spread all over the sky.


मुझे अपनी माँ की याद तभी आती है 

जब मैं अपने शयनकक्ष की खिड़की से दूर 

के नीले आकाश की ओर देखता हूँ, 

मुझे ऐसा लगता है कि मेरे चेहरे पर 

मेरी माँ की निगाहों की खामोशी पूरे आकाश में फैल गई है।


Summary in Hindi


खिलौनों में माँ की याद : कवि कहते हैं कि उन्हें अपनी माँ का चेहरा ठीक से याद नहीं है, लेकिन कभी-कभी खेलते समय उनके खिलौनों के ऊपर एक जानी-पहचानी धुन मंडराने लगती है。यह वही लोरी या गीत होता है जो उनकी माँ बचपन में उनका पालना झूलाते हुए गुनगुनाया करती थीं。


पूजा के फूलों में खुशबू : जब सुबह के समय मंदिर में पूजा के लिए फूल तोड़े जाते हैं और उनकी सुगंध चारों ओर फैलती है, तो कवि को ऐसा महसूस होता है जैसे यह उनकी माँ की ही खुशबू हो जो पूरे घर में महक रही है।


पालने का दृश्य : जब कवि आसमान में सुबह की खिली हुई धूप (जो कि एक नए दिन की शुरुआत का प्रतीक है) को देखते हैं, तो उन्हें अपनी माँ के पल्लू की छाया और उनके शांत व स्नेह भरे स्पर्श की याद आ जाती है。


निष्कर्ष :यह कविता दर्शाती है कि भले ही माँ शारीरिक रूप से बच्चे के साथ नहीं है, लेकिन उनका प्यार, उनकी यादें, और उनका स्पर्श हमेशा बच्चे के मन और आसपास के वातावरण में मौजूद रहता है。

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