I
Prabhat always wanted …………………………… at like badminton.
प्रभात हमेशा जीतना चाहता था। उसके माता-पिता, शिक्षक और दोस्त कहते थे कि उसे हार स्वीकार करना नहीं आता था। असलियत यह थी कि वह हार बर्दाश्त नहीं कर पाता था, यहाँ तक कि कंचों के खेल में भी नहीं। जीतने पर उसे इतनी खुशी होती थी कि वह उस खुशी को कभी छोड़ना नहीं चाहता था। इसके विपरीत, हारने पर उसे बहुत बुरा लगता था। वह सोचता था कि हारना किसी के साथ होने वाली सबसे बुरी बात है।
अगर प्रभात को लगता कि वह कोई खेल हार जाएगा, तो वह नहीं खेलता था। वह तभी खेलता था जब उसे जीत का पूरा भरोसा होता था, भले ही खेल सिर्फ एक मिनट का ही क्यों न हो। उसे बैडमिंटन जैसे खेलों को खेलने से कोई नहीं रोक सकता था, जिनमें वह वाकई माहिर था।
A new students joined ………………………………. was looking elsewhere.
प्रभात के स्कूल में एक नया छात्र दाखिल हुआ, जिसका नाम सूर्या था। सूर्या एक बेहतरीन बैडमिंटन खिलाड़ी था। प्रभात महीने के आखिरी शुक्रवार का बेसब्री से इंतजार करता था। आखिरी शुक्रवार खास होता था। इसी दिन कोच खेल सत्र में दोस्ताना मैच करवाते थे। टीमें सोमवार को तय हो गई थीं और इसमें कोई हैरानी की बात नहीं थी कि प्रभात और सूर्या को एक-दूसरे के खिलाफ खेलने के लिए चुना गया। प्रभात को मैच का स्कोर रखने की जिम्मेदारी दी गई। एक तरफ प्रभात मैच की तैयारी बड़े सजगता से कर रहा था। दूसरी तरफ सूर्या बिल्कुल बेफिक्र और तनावमुक्त लग रहा था। वहपूरे समय,इधर-उधर घूम रहा, सूर्या मुस्कुराता रहा और तरह-तरह के चुटकुले सुनाता रहा। लेकिन शुक्रवार को बैडमिंटन कोर्ट पर सूर्या का प्रदर्शन अद्भुत था। वह लगातार हंसता-मजाक करता रहा और अंक जीतता रहा। हालांकि, सूर्या मैच पर इतना कम ध्यान दे रहा था कि प्रभात ने अपने प्रतिद्वंदी के कहीं और देखने का फायदा उठाते हुए स्कोरबोर्ड बदल दिया।
Prabhat managed ……………………………. said Surya.
प्रभात ने धोखे से जीत हासिल की। उसने अपनी जीत का खूब प्रचार किया, लेकिन सूर्य को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।
“मज़ेदार रहा। हमें कभी और खेलना चाहिए,” सूर्या ने कहा |
II
On that day, everyone .…………………………. left his face.
उस दिन सभी लोग अपने खेल और प्रभात के शानदार प्रदर्शन के बारे में चर्चा कर रहे थे। हैरानी की बात यह थी कि प्रभात उस रात ठीक से सो नहीं पाया। वह खेल जीत गया था, लेकिन उसे उतनी खुशी नहीं थी जितनी आमतौर पर होती थी। हैरानी की बात यह थी कि सूर्य को हारने का ज़रा भी दुख नहीं हुआ। उससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह थी कि प्रभात ने देखा किअगले दिन सूर्या बास्केटबॉल खेल रहा था।वह इसमें इतना बेकार था कि दस मिनट तक एक भी बास्केट नहीं कर पाया। फिर भी, उसे खेल खेलने में आनंद आता था। उसके चेहरे से मुस्कान कभी नहीं हटती थी।
Prabhat kept a close ………………………… every moment of it.
प्रभात ने कुछ दिनों तक सूर्य पर कड़ी नज़र रखी। वह कुछ चीज़ों में बहुत अच्छा था, कुछ में बहुत बुरा, लेकिन दोनों में एक बात समान थी – हर चीज़ का आनंद लेना। वह हर चीज़ का समान रूप से आनंद लेता था। जैसे-जैसे प्रभात का अवलोकन जारी रहा, उसे एहसास हुआ कि खेल का आनंद लेने के लिए स्कोरबोर्ड की ज़रूरत नहीं होती। न ही जीतने या हारने की चिंता करनी पड़ती है। खेल का आनंद लेना ही काफ़ी है। महत्वपूर्ण बात है अच्छा प्रदर्शन करने का प्रयास करना,और वह हर पल का आनंद लेना।
Prabhat learnt something……..……………….. great sporting spirit.
प्रभात हर दिन के अवलोकन से कुछ न कुछ सीखता था और जल्द ही उसने अपने अंदर बदलाव महसूस करना शुरू कर दिया। उसने लुका-छिपी खेलना भी शुरू कर दिया था और खेल खत्म होने पर उसे दुख होता था। बैडमिंटन खेलते समय भी वह मजाक करने लगा था। जल्द ही, दूसरे छात्र आपस में कहने लगे, “प्रभात के साथ खेलना बहुत मजेदार है, उसमें खेल भावना तो वाकई बहुत है।“